बिहार में कृषि अवशेष प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और टिकाऊ कृषि की आवश्यकता लेखक: हयात अशरफ बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। धान, गेहूँ, मक्का और अन्य फसलों की खेती से किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। लेकिन फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों का उचित प्रबंधन नहीं होने पर पर्यावरण, मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कृषि अवशेषों को जलाना इसका एक संभावित कारण है, जबकि उनका उपयोग पशुचारे, जैविक खाद, मल्चिंग और अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। आवश्यकता ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है, जिसमें कृषि अवशेषों को बेकार पदार्थ के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में देखा जाए। कृषि अवशेषों के प्रबंधन की चुनौती बिहार के सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। फसल का प्रकार, कटाई का समय, खेतों का आकार, उपलब्ध मशीनें, पशुपालन की स्थिति और किसानों की आर्थिक क्षमता इसके विकल्पों को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी एक तकनीक को सभी किसानों के लिए अनिवार्य समाधान मानना उचित नहीं होगा। स्थानीय कृषि परिस्थितियों का अध्ययन ...