बिहार में नदियों का संरक्षण प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक संतुलन और सतत जल प्रबंधन लेखक: हयात अशरफ नदियाँ किसी भी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, पर्यावरणीय संतुलन और आर्थिक गतिविधियों का महत्त्वपूर्ण आधार होती हैं। बिहार में नदियों का महत्त्व विशेष रूप से अधिक है, क्योंकि कृषि, पेयजल, मत्स्य पालन, स्थानीय आजीविका और प्राकृतिक पारिस्थितिकी अनेक रूपों में नदी तंत्र से जुड़े हैं। इसके बावजूद घरेलू अपशिष्ट, अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और नदी तटों पर अनियोजित गतिविधियों से जल गुणवत्ता तथा नदी पारिस्थितिकी पर दबाव पड़ सकता है। नदियों का संरक्षण इसलिए केवल स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव विविधता और भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है। नदियों के संरक्षण की पहली आवश्यकता उनके जल की गुणवत्ता और प्रवाह की नियमित निगरानी है। नदी के विभिन्न हिस्सों से निर्धारित अंतराल पर नमूने लेकर जल गुणवत्ता का परीक्षण किया जाना चाहिए। इसमें घुलित ऑक्सीजन, जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग, रासायनिक प्रदूषण, रोगजनक सूक्ष्मजीवों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार...