मासिक धर्म अवकाश: महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, फिर भी आज भी लाखों महिलाओं को शारीरिक परेशानियों, सामाजिक भेदभाव और मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की अनेक महिलाओं और लड़कियों के लिए किफायती सैनिटरी पैड, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पानी और मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित सही जानकारी तक पहुंच आसान नहीं है। यह केवल किसी एक महिला की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पेट में ऐंठन, कमर दर्द, सिरदर्द, थकान, कमजोरी, मतली, मनोदशा में बदलाव और एकाग्रता में कठिनाई जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ महिलाओं को तेज दर्द या अत्यधिक रक्तस्राव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके लिए सामान्य दिनचर्या और नियमित काम करना बेहद मुश्किल हो जाता है। खेतों में काम करने वाली महिलाओं, कारखानों की श्रमिकों, शिक्षिकाओं, कार्यालयों में कार्यरत महिलाओं और अन्य कामकाजी महिलाओं के लिए पर्...