पंचायत से संसद तक: मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था हो अनिवार्य
महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और समान अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) की व्यवस्था पंचायत से संसद तक, सभी सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्रों में लागू करने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए।
ग्राम पंचायत, प्रखंड, जिला परिषद, नगर निकाय, राज्य सरकार के कार्यालयों, विधानसभाओं, संसद और निजी संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानियों के मद्देनजर उचित राहत मिलनी चाहिए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 42 में निहित समानता, गरिमा, महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान और मानवीय कार्य परिस्थितियों के सिद्धांत इस विषय पर नीतिगत पहल के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
केंद्र सरकार को राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसी राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार करना चाहिए, जिसमें सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश, महिलाओं की निजता की सुरक्षा और किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचाव के स्पष्ट प्रावधान हों।
महिलाओं का स्वास्थ्य कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि सम्मानजनक कार्यजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंचायत से संसद तक, हर संस्थान में महिलाओं की शारीरिक जरूरतों के प्रति संवेदनशील व्यवस्था होनी चाहिए।
हयात अशरफ
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